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  • जानिए विश्वप्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान “पशुपतिनाथ” महादेव के मंदिर में आज क्या हो रहा है…?

    मंदसौर, ललित शंकर धाकड। विश्वप्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ महादेव के मंदिर मे शिवरात्रि पर्व की धुम है। समूचे नगर में शिवरात्रि पर्व का वातावरण बना हुआ है। पशुपतिनाथ मंदिर मे आज एक लाख से अधिक भक्त दर्शन करने पहुंचेगे। सुरक्षा को देखते हुऐ मंदिर परिसर मे पुलिस बल तैनात है और सीसीटीवी कैमरो की भी नजर है। अल सुबह से ही बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन करने हेतु भक्तो की भीड उमड रही है। मंदिर परिसर को आकर्षक रंगोली और चुनरियों से सजाया गया है । भक्त बाबा के विवाह उत्सव को हर्ष के साथ मना रहे हैं।

    कैमरों की निगाहों में है पशुपतिनाथ मन्दिर परिसर
    एसडीएम बिहारी सिंह ने बताया कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों को जगह-जगह लगाया गया है ताकि भीड़ में कोई भी आपराधिक तत्व अपने किसी भी तरह की हरकत को अंजाम नहीं दे सके। विशेषकर जेब कतरों की आशंका रहती है।  शिवना नदी के परिक्षेत्र में लाइफ गाई भी तैनात किए गए हैं जो किसी विशेष परिस्थिति में लोगों के जीवन की रक्षा करेंगे।

    सायंकाल में होगा शास्त्रीय संगीत का विशेष आयोजन
    प्रबंध समिति के कार्यालय प्रबन्धक राहुल रुनवाल ने बताया कि सायंकाल में संस्कृति परिषद की ओर से शिव आराधना पर केन्द्रित शास्त्रीय संगीत से शिव आराधना का विशिष्ट आयोजन होगा। सधे हुए कलाकार ठोक गायन की शैली में शिव आराधना शास्त्रीय संगीत के माध्यम से करेंगे।

    शिव- पार्वती का विवाह उत्सव
    माता पार्वती को दुल्हन के रूप में और भगवान पशुपतिनाथ महादेव को दुल्हे की तरह सजाया गया है। पशुपतिनाथ मंदिर में महादेव की शादी का तीन दिवसीय कार्यक्रम चल रहा है। जिसके अंतर्गत सोमवार को माता पार्वती को दुल्हन के रूप में सजाया गया। नियमित भक्तगण अग्रवाल धर्मशाला से माता पार्वती का चुन्नी वेस व गहने लेकर नाचते गाते मंदिर प्रांगड़ आये और माता पार्वती को दुल्हन के रूप में सजाया। गर्भगृह में स्थित सभी देवी-देवताओं को नवीन वस्त्र धारण करवाये गये थे।

    अनूठी है भगवान पशुपतिनाथ की महिमा
    मंदसौर पशुपतिनाथ मंदिर को लेकर अनोखी कथा प्रचलित है। माना जाता है कि उदाजी नाम के धोबी शिवना नदी पर एक शिला पर बैठकर कपड़े धोया करते थे। एक रात में स्वप्न में भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि मुझे शिवना की कोख से निकालें। इसके बाद अगले दिन उस शिला के आसपास खुदाई की गई तो वहां भगवान शिव की अष्टमुखी प्रतिमा थी। 1940 में उदाजी ने प्रतिमा को शिवना के तट पर विराजित कर दिया। 1961 में प्रत्यक्षानंद महाराज ने यहां भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा कर भगवान शिव के मंदिर को पशुपतिनाथ का नाम दिया। आज यहां देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

    ढाई हजार साल पुरानी है प्रतिमा
    पशुपतिनाथ प्रतिमा को लेकर इतिहासकारों का अलग मत है। पुरातत्व विभाग के अनुसार यह प्रतिमा करीब ढाई हजार साल पुरानी है। कुछ लोगों का दावा है कि यह प्रतिमा 14वीं शताब्दी में बनाई गई थी। इतिहासकारों का तर्क है कि यह प्रतिमा शेव काल और गुप्तकाल की हो सकती है। इस प्रतिमा इसके आठ मुख, साढ़े 7 फीट ऊंचाई और इसका वजन है। माना जाता है कि शिव के 8 चेहरों में बाल्य, युवा, किशोरवस्था और प्रोणवस्था के रूप के दर्शन होते हैं।

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