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  • रिंकू सिंह ने कुछ ही समय में हासिल किया सालों की मेहनत से मिलने वाला मुकाम

    रिंकू सिंह ने कुछ ही समय में हासिल किया सालों की मेहनत से मिलने वाला मुकाम

    स्पोर्ट डेस्क। छोटे से करियर में रिंकू सिंह ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जो हासिल करने में खिलाड़ियों को कई साल लग जाते हैं। रिंकू सिंह ने 15 T-20I की 11 पारियों में 176.23 की स्ट्राइक रेट और 89 की औसत से रन बनाए हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे T-20 में भारत का स्कोर 4.3 ओवर में 22 पर 4 आउट था।

    कप्तान रोहित शर्मा ने पांचवें विकेट के लिए रिंकू सिंह के साथ 93 गेंद पर 190 रन की अटूट साझेदारी बनाई। हिटमैन ने 69 गेंद पर 11 चौकों और 8 छक्कों की मदद से 121* रन जड़े। रिंकू सिंह ने भी 39 गेंद पर 2 चौकों और 6 छक्कों की मदद से 69* रन ठोके। रिंकू सिंह ने IPL में जब यश दयाल को आखिरी ओवर में 5 छक्के जड़कर अपनी टीम को जीत दिलाई थी, तब लोगों को लगा था कि यह महज एक तुक्का था जो लग गया।

    उस पारी के बाद से ही रिंकू सिंह ने ऐसी तमाम पारियां खेलकर साबित किया कि वे 5 छक्के महज तुक्के नही थे। रिंकू सिंह ने करीम जनत को आखिरी ओवर में दिखाया कि उनका पाला किससे पड़ा है। करीम जनत की आखिरी 3 गेंद पर रिंकू सिंह ने लगातार 3 छक्के जड़कर चिन्नास्वामी के मैदान पर सनसनी फैला दी।

    रिंकू सिंह भारतीय टीम के वह तुरुप के इक्के बन चुके हैं, जिनकी जगह अब कोई भी नही ले सकता है।।रोहित शर्मा और रिंकू सिंह ने मिलकर T-20I मैच के एक ओवर में सर्वाधिक 36 रन बनाने के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। करीम जनत के ओवर की पहली 3 गेंद पर 18 रन आए। करीम जनत की चौथी लेंथ डिलीवरी को रिंकू सिंह ने छक्के के लिए डीप मिडविकेट स्टैंड में पहुंचा दिया।

    पांचवीं लोअर फुल टॉस पर भी रिंकू सिंह ने डीप मिडविकेट की दिशा में छक्का लगा दिया। अंतिम शॉर्ट बॉल डीप स्क्वायर लेग की दिशा में छक्के के लिए गई। इस तरह करीम जनत के 20वें ओवर से कुल मिलाकर 36 रन आए। युवराज सिंह ने 2007 के वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड के खिलाफ 6 सिक्स लगाकर 36 रन बनाए थे।

    जबकि पोलार्ड ने 2021 में श्रीलंका के अकिला धनंजय के खिलाफ 6 सिक्स लगाकर 36 रन बनाए थे। T-20 इंटरनेशनल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब 2 बल्लेबाजों ने मिलकर एक ओवर में 36 रन का आंकड़ा छुआ हो। रिंकू सिंह मिडिल ओवरों में सिंगल-डबल लेकर साझेदारी बनाने में भी माहिर हैं।

    रिंकू सिंह अंत के ओवरों में तेजी से रन बनाकर फिनिशर की भूमिका निभाने में भी सक्षम हैं। दरअसल रीयल टैलेंट की भारत में कोई कमी नही है, लेकिन टीम में चयन अगर सिफारिशों के आधार पर ना हो तो भारतीय टीम में ऐसे टैलेंटेड खेलते दिखेंगे जो किसी भी परिस्थिति में भारतीय टीम को जिताने की क्षमता रखते हैं।

    रिंकू सिंह उन्हीं में से एक हैं। अब भारतीय कप्तान और कोच को चाहिए कि बड़े नामों की बजाय ऐसे ही खिलाड़ियों का चयन टीम में किया जाए, जो वास्तव में मैच विनर हों। भारतीय टीम भाग्यशाली है कि उसे महेन्द्र सिंह धोनी के बाद एक महान और बङा फिनिशर मिल चुका है।

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