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  • केन्द्र एवं राज्य सरकार पर तानाशाही के आरोप लगाकर प्रदेश भर में कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

    केन्द्र एवं राज्य सरकार पर तानाशाही के आरोप लगाकर प्रदेश भर में कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

    छतरपुर। 22 दिसंबर को भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा की गई 141 सांसदों के निलंबन की कार्यवाही और मध्यप्रदेश विधानसभा से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर हटाए जाने के विरोध में शुक्रवार को पूरे प्रदेश में कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे गए।

    छतरपुर में कांग्रेस नेत्री दीप्ती पांडे ने कहा कि देश में हो रही लोकतंत्र की हत्या और आम जनमानस के हित में सड़क से संसद तक की लड़ाई लड़ने के लिए आज हम मैदान में उतरे हैं। उन्होंने कहा कि देश की संसद में जब सवाल उठाए जाती है तो मोदी सरकार द्वारा सांसदों को निलंबित किया जा रहा है। वहीं मध्यप्रदेश विधानसभा से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर हटाना उनका अपमान है, जो कि हम नहीं सहेंगे।

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    सांसदों पर की गई कार्यवाही लोकतंत्र की हत्या: डॉ सतीश सिकरवार

    ग्वालियर। ग्वालियर के फूलबाग चौराहे पर सेव डेमोक्रेसी धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा ने लोकसभा में सांसदों पर की गई निलंबन कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। वहीं धरना प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस विधायक डॉ सतीश सिकरवार ने कहा कि सांसदों पर की गई कार्रवाई के माध्यम से लोकतंत्र की हत्या की गई है। कांग्रेस इस कार्रवाई का विरोध करती है और सांसदों का निलंबन वापस लेने की मांग करती है।

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    सरकार ने सांसदों को अलोकतांत्रिक तरीके से किया निलंबित: कांग्रेसी

    टीकमगढ़। टीकमगढ़ में कांग्रेसियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर भाजपा पर सवाल उठाए। कांग्रेसियों ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के सांसदो द्वारा संसद पर हुये हमले के संबंध में विपक्षी सांसदो द्वारा संसद की सुरक्षा पर चर्चा में हुई चूक को लेकर देश के गृहमंत्री अमित शाह संसद की सुरक्षा पर चर्चा व जबाव की मांग पर 141 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया, जबकि विपक्षी सांसद संवैधानिक, संसदीय नियमों के तहत सरकार का पक्ष चाह रहे थे।

    भाजपा सरकार ने विपक्षी सांसदो की मांग को हंगामा करार देते हुये संसदीय कार्य में व्यवधान मान कर, सांसदों की आवाज दबाते हुये 141 सांसदों को अलोकतांत्रिक तरीके से न सिर्फ निलंबित किया बल्कि राष्ट्र की जनता के सामने संसद पर हुये हमले की सच्चाई न पहुचे सरकार ने अपना उल्लंघन किया है जो सांसदो का हक एवं क्षेत्र की जनता के प्रति जबावदेदी है। स्वतंत्रता का हनन कर 141 सांसदो को सदन से निलंबित कर लोकतंत्र की हत्या कर रही है।

    सदन में 141 सांसदो की अनुपस्थिति में तीन महत्वपूर्ण बिल बिना किसी चर्चा किये पास कराना केन्द्र की भाजपा सरकार की तानाशाही का प्रतीक है। मांग कि है कि केन्द्र की भाजपा सरकार की ताना शाही अलोकतांत्रिक रवैया और संसदीय नियमों के विपरीत निलंबन कर अंकुश लगाये ताकि संविधान, संसदीय नियमो की गरिमा बनी रहे ।

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