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  • विधान सभा चुनाव के दौरान पेड न्यूज पर नजर रखेगी एमसीएमसी समिति

    चुनाव, विधान सभा चुनाव के दौरान पेड न्यूज पर नजर रखेगी एमसीएमसी समिति

    छतरपुर। आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान मीडिया मॉनिटरिंग सर्टिफिकेशन एण्ड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) मीडिया पैड न्यूज, फैक न्यूज आदि पर नजर रखेगी और आवश्यक कार्यवाही करेगी। इस संबंध में शुक्रवार को संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उप जिला निर्वाचन अधिकारी और मीडिया के नोडल अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

    प्रत्येक जिला में जिला स्तरीय सर्टिफिकेशन एण्ड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) मीडिया गठन किया गया है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी इसके अध्यक्ष होंगे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी, एक मध्यस्थ विशेषज्ञ या सोशल मीडिया एक्सर्ट, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी, एक स्वतंत्र नागरिक और इसके सदस्य सचिव जिला जनसंपर्क अधिकारी होंगे। नामांकन दाखिल करने की तिथि से पैड न्यूज के मामलों में ध्यान रखा जाएगा।

    समिति विज्ञापनों का प्रमाणन भी करेगी, शिकायतों की जांच तथा पैड न्यूज के प्रकरणों की संवीक्षा करेगी। समस्त इलेक्टॉनिक विज्ञापन पूर्व प्रमाणीकरण की सीमा में आएगे। समिति निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी से किसी एक या अधिक माध्यम से प्रसारण हेतु प्रस्तावित विज्ञापन का आवेदन प्राप्त करेगी और आवेदन प्रसारण की प्रस्तावित तिथि से 3-7 दिन पूर्व किया जाना चाहिए।

    प्रत्येक आवेदन दो प्रतियों में विज्ञापन प्राप्त किया जाएगा। आवेदन प्राप्त होने पर उसकी जांच कर, प्रस्तावित विज्ञापन प्रसारण योग्य है या नहीं का निर्णय करेगी। ऐसा निर्णय आवेदन प्राप्त होने के 2 दिनों के भीतर लिया जाकर आवेदक को सूचित करना होगा। राजनैतिक दलों/अभ्यर्थियों को सुविधा देने एवं विज्ञापन के प्रमाणन के कार्य को तेजी से पूर्ण करने के लिए आवेदन का निराकरण उसी दिन किये जाने का प्रयास जाएगा। विज्ञापन प्रसारण योग्य होने की दशा में प्रसारण के लिए प्रमाणन जारी करेगी।

    कमेटी किसी प्रस्तावित विज्ञापन के आवेदनों को अमान्य कर सकती है। यदि विज्ञापन कंटेट आदर्श आचार संहित का उल्लंघन करता हो। राजनैतिक दल या अभ्यर्थी के विरूद्ध हो। नैतिकता एवं शालीनता को समाप्त करता हो, धर्म, जाति समुदायों के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देता हो, किसी विज्ञापन के प्रसारण के प्रमाणन का आवेदन प्राप्त होने पर कमेटी को विज्ञापन के किसी भी भाग के विलोपन संशोधन का आदेश जारी करने का आदेश दे सकता है। समस्त इलेक्टॉनिक विज्ञापन प्रमाणीकरण की सीमा में आएगे।

    इसमें वेबसाइट एवं सोशल मीडिया वेबसाइट शामिल होगे। तथापि फ्लेक्स, होर्डिंग वॉलपेपर इस परिधि में नहीं आते परन्तु इन पर एमसीसी, आरपीएक्ट 1951 की धारा 124-ए तथा व्यय संबंधी प्रावधान लागू होगे। राजनीतिक दल अभ्यर्थी स्वयं के ब्लॉग सेल्फ अकाउण्ट पर पोस्टेड अपलोड किये जाने वाले वीडियो फोटो संदेश कमेण्ट पर पूर्व प्रमाणीकरण आवश्यक नहीं होगा।

    चुनाव में प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों का होगा प्रमाणन

    मतदान के दिन तथा उससे एक दिन पूर्व राजनैतिक दल, अभ्यर्थी, संगठन या व्यक्ति द्वारा प्रिंट मीडिया में प्रकाशित कराये जाने वाले विज्ञापनों का एमसीएमसी से प्रमाणन अनिवार्य है। ऐसे प्रकाशन के प्रमाणीकरण हेतु प्रकाशन तिथि से दो दिन पूर्व समिति को आवेदन करना होगा। ऐसे विज्ञापन जो किसी के पक्ष/विरोध में प्रकाशित किया जा रहा है उस पर मुद्रक एवं प्रकाशक का नाम होना चाहिये (आरपी एक्ट 1951 की धारा 127-ए) पिं्रट मीडिया में प्रकाशित सभी विज्ञापनों का खर्च अभ्यर्थी के निर्वाचन व्यय में जोडा जायेगा।

    अभ्यर्थी की सहमति के बिना उसके निर्वाचन की संभावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से जारी विज्ञापन आईपीसी की धारा 171-ए (निर्वाचन के संबंधी में अवैध भुगतान) के तहत अपराध है। आरपी एक्ट 1951 की धारा 127ए के अनुसार पंपलेट, पोस्टर, हैण्ड बिल आदि में प्रकाशक एवं मुद्रक का नाम एवं पता होना आवश्यक है।

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