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  • अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे किसान, अंबाला में जीआरपी के एसआई की मौत

    अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे किसान, अंबाला में जीआरपी के एसआई की मौत

    नई दिल्ली। पंजाब के किसानों के दिल्ली कुच के चौथे दिन अंबाला में एक तैनात जीआरपी के एसआई हीरालाल की मौत हो गई। इसकी वजह आंसू गैस के गोले से दम घुटना बताई जा रही है। उधर, किसान अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा के पिछले आंदोलन में अगुवाई कर चुकी भाकियू ने रुख तय करने के लिए सिसौली में पंचायत बुलाई है।

    पांच राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ मंत्रणा कर रणनीति तय की जाएगी। उधर, संयुक्त किसान मोर्चा और मजदूर संघ ने शुक्रवार को ग्रामीण भारत बंद बुलाया है। इसमें गांवों में दुकानें बंद करने और किसानों के खेतों में काम न करने को कहा गया है। हरियाणा, पंजाब और हिमाचल में बाजार बंद हैं। रोडवेज की बसें नहीं चल रही हैं। राजस्थान में हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बंद का असर है। बीकेयू (चढ़ूनी) के कार्यकर्ताओं ने हरियाणा के कई टोल नाकों को 3 घंटे के लिए फ्री कराया।

    हरियाणा-पंजाब के दातासिंह वाला बॉर्डर (पंजाब के लिए खनौरी बॉर्डर) पर पुलिस से टकराव करने व तेजधार हथियार से हमला करने के मामले में जींद की गढ़ी थाना पुलिस ने भारतीय किसान नौजवान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिमन्यु कोहाड़ सहित 6 किसानों पर मामला दर्ज किया है।

    उन पर धारा 144 का उल्लंघन करने, हत्या के प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा डालने, तोडफ़ोड़ करने की धाराएं लगाई गई हैं। वहीं, पुलिस ने इस मामले में सोनीपत जिले के गांव कथूरा निवासी अक्षय नरवाल, रोहतक जिले के मदीना गांव निवासी प्रवीन, कोयल गांव निवासी वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है।

    पंजाब में किसानों और सरकार के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी है। तीसरे दौर में रविवार शाम छह बजे बैठक की तैयारी है। तीसरे दौर की बातचीत से पहले शनिवार को भाकियू की पंचायत है। ऐसे में यह भी संभव है कि तीसरे दौर की बातचीत के बाद ही संगठन किसी अगले कदम का एलान करें।

    पंजाब में जोर पकड़ रहे किसान आंदोलन का असर अभी तक पश्चिम उत्तर प्रदेश में कम दिखा है। दिल्ली कूच पर अभी तक फैसला नहीं हुआ। संयुक्त किसान मोर्चा के पिछले आंदोलन में अगुवाई कर चुकी भाकियू ने रुख तय करने के लिए शनिवार को सिसौली में पंचायत बुलाई है। पांच राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ मंत्रणा कर रणनीति तय की जाएगी।

    आंदोलन के हरियाणा पहुंचते ही पश्चिम यूपी के किसान भी बॉर्डर पर डट सकते हैं। पिछली बार तीन कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बॉर्डर पर भाकियू ने मोर्चा संभाला था। 26 जनवरी के बाद बिखरते किसान आंदोलन को संजीवनी भी गाजीपुर बॉर्डर से ही मिली थी। 28 जनवरी की रात भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आंसूओं ने आंदोलन में दोबारा जान डाल दी थी।

    इस बार पंजाब के किसानों ने फिर से दिल्ली का रुख किया। पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान पंजाब और हरियाणा में बदल रहे माहौल पर निगाह रखे हुए हैं। किसानों का कहना है कि सरकार को बातचीत के जरिए ही समस्या का समाधान निकालना चाहिए। शंभू सीमा पर हुए टकराव के बाद किसानों के बीच नाराजगी बढ़ी है।

    लेकिन अभी तक दिल्ली चलो पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे माहौल में लोगों की निगाह भाकियू पर भी टिकी है। भाकियू टिकैत ने इस बार मासिक पंचायत सिसौली के किसान भवन पर बुलाई है। भाकियू नेता गौरव टिकैत ने बताया कि पंजाब, यूपी, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड के संगठन के प्रमुख प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है। किसान आंदोलन पर संगठन की निगाह टिकी है। सिसौली की मासिक पंचायत में ही सर्वसम्मति से निर्णय किया जाएगा।

    पिछला किसान आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली की सीमा पर किया था। भाकियू टिकैत भी संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा है। इस बार पंजाब के किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा अराजनैतिक के बैनर तले आंदोलन शुरू किया है। हालांकि दोनों के मुद्दे एमएसपी की गारंटी और स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट ही हैं। किसानों पर दर्ज पुलिस केस वापस लेने जैसी मांगों पर सहमति बन चुकी है। दूसरे मोर्चा में होने के चलते भाकियू में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    आंदोलन का असर अभी तक पंजाब में अधिक है। हरियाणा में किसान आंदोलन के मैदान में नहीं उतरे। पंजाब से सटे अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और डबवाली में जरूर किसान संगठन अलर्ट मोड़ पर है। अगर पंजाब के किसान हरियाणा से होते हुए दिल्ली की सीमा पर पहुंचे तो पश्चिम यूपी में किसान मोर्चा संभाल सकते हैं।

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