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    मिल के श्रमिकों को नए मुख्यमंत्री 26 दिसम्बर को देंगे उनके हक का पैसा

    इंदौर। 32 वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हुकमचंद मिल के श्रमिकों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद 26 दिसम्बर को इंदौर आकर उनके हक की राशि देंगे। कल सीएम ने मिल का बकाया 464 करोड़ रुपए देने की फाइल पर दस्तखत कर दिए। इस खबर के बाद श्रमिकों की आंखों में खुशी की चमक आ गई। हालांकि अपने साथियों के चले जाने का गम भी है।
    12 दिसम्बर 1991 को अचानक बंद कर दी गई हुकमचंद मिल के 5885 श्रमिक तब से दर-दर भटक रहे हैं। संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र श्रीवंश ने बताया कि अब तक 2500 से ज्यादा श्रमिकों की मौत हो चुकी है और 70 श्रमिक ऐसे हैं जिन्होंने पैसे के अभाव में तंग आकर मौत को गले लगा लिया। आज भी ऐसे कई श्रमिक हैं जो लाइलाज बीमारी या इलाज के पैसे न होने की स्थिति में बिस्तर पर जीवन काटने को मजबूर हैं। उनकी आंखों में वर्षों से बस यही सवाल तैर रहा है कि आखिर कब उनके हक का पैसा मिलेगा? लेकिन आखिरकार वो शुभ घड़ी आ ही गई जब उनके हक का पैसा उन्हें मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कल उन्हें पैसा देने की फाइल पर दस्तखत कर दिए। वे 26 दिसम्बर को इंदौर आ रहे हैं और संभावना है कि वे इसी दौरान हुकमचंद मिल के श्रमिकों को अपने हाथों से राशि वितरित करेंगे। हाईकोर्ट ने हुकमचंद श्रमिकों के लिए 229 करोड़ रुपए का क्लेम मंजूर किया था जिसमें से 50 करोड़ रुपए सरकार से श्रमिकों को दिलवाए थे। शेष 179 करोड़ में से मप्र हाऊसिंग बोर्ड ने 174 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। श्रमिकों ने इसके अलावा, सरकार से 88 करोड़ रुपए ब्याज की मांग भी की थी। इसमें से शिवराज सरकार की आखरी कैबिनेट ने 44 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। इस प्रकार, श्रमिकों को कुल 223 करोड़ रुपए वितरित होंगे। बोर्ड ने इसके अलावा, विभिन्न बैंकों के बकाया राशि भी मिलाकर कुल 464 करोड़ रुपए दे दिए हैं बदले में हुकमचंद मिल की कुल 42.5 एकड़ जमीन ले ली है। इस जमीन पर या तो आईटी पार्क या फिर आवासीय योजना लाई जाएगी। आचार संहिता के दौरान भी श्रमिकों को भुगतान की प्रक्रिया जारी रही और अब नई सरकार ने इस पर संज्ञान लेकर श्रमिकों के चेहरों पर हंसी-खुशी लौटा दी।

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