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    जब अकेले ही क्रिकेट एकेडमी में भर्ती होने आगरा से नोएड पहुंच गए थे घ्रुव जुरेल

    स्पोर्ट डेस्क। 13 साल की उम्र में ध्रुव जुरेल अकेले ही क्रिकेट एकेडमी में भर्ती होने आगरा से नोएडा चले गए थे। कोच को पहले लगा कि बच्चा लोकल यानी नोएडा का होगा, तभी अकेले आ गया। लेकिन फिर ये बच्चा बोला, सर, मैं आगरा से अकेला आया हूं। जिस दोस्त ने मेरे रहने की व्यवस्था करने का वादा किया था, अब फ़ोन नहीं उठा रहा।

    ये सब सुनकर लगा कि ये बालक कहीं घर से तो नहीं भाग आया। कोच फूल चंद ने ध्रुव से उसके पापा का नंबर मांगा और फोन किया। उधर से पिताजी बोले, मैं आता, लेकिन पिताजी की तेरहवीं थी और बच्चे ने कहा कि चिंता मत करिए। मैं आगरा से दिल्ली की ट्रेन ले लूंगा। कोच ने बताया है कि 13 साल के बच्चे के अकेले आने की कहानी जान मुझे लगा कि ये बच्चा स्पेशल है।

    मेरी एकेडमी में, अगर आपके पास मेरिट है तो इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि आप रिक्शेवाले के बेटे हैं या मंत्री के। आपको हर मौका मिलेगा। ध्रुव शुरुआत से ही बहुत मेहनती था और उसके पास टैलेंट भी था। उसके लिए परफ़ॉर्म करते हुए आगे जाना मुश्किल नहीं था। अगर मुझे पता है कि लड़का आगे जा सकता है, तो मैं अपनी जेब से उसे बेस्ट चीजें दिलाता हूं। भगवान का शुक्र है कि मैं बहुत से इंडिया, अंडर-19 और फ़र्स्ट क्लास क्रिकेटर्स बना चुका हूं।

    ध्रुव जुरेल की कहानी अद्भुत है। उनके पिताजी कारगिल की जंग में लड़े थे। बाद में रिटायर हुए, तो घर के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। अपनी पहली किट के लिए ध्रुव को घर में ही सत्याग्रह करना पड़ा था। उन्होंने खुद को वॉशरूम में बंद कर लिया, जिसके बाद उनकी माताजी ने अपनी सोने की चेन गिरवी रखी और फिर ध्रुव को किट मिली। राजकोट टेस्ट से डेब्यू करने वाले ध्रुव ने पहली पारी में 104 गेंद पर 2 चौकों और 3 छक्कों के साथ 46 रन बनाए। उन्होंने रविचंद्रन अश्विन के साथ बेहतरीन पार्टनरशिप की। दोनों की बदौलत टीम इंडिया ने पहली पारी में 445 रन बनाए।

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