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  • भगवान विष्णु से द्वेष तथा ब्रह्मा की तपस्या

    महराजपुर(शिवम चौरसिया)। सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा चौथे दिन कथा व्यास आचार्य श्री वेदान्त जी महाराज के मुखारविंद से कथा का रसपान कर रहे भक्त जब हिरण्यकश्यप के छोटे भाई हिरण्याक्ष का भगवान विष्णु के वराह अवतार ने वध कर दिया तथा पृथ्वी को पुन: जल से ऊपर ले आये तो हिरण्यकश्यप प्रतिशोध की अग्नि में जलने लगा। वह भगवान विष्णु से इसका बदला लेना चाहता था तथा इसके लिए उसका शक्ति अर्जित करना अति-आवश्यक था। उसने देवों के परम गुरु भगवान ब्रह्मा की तपस्या करनी शुरू कर दी।
    भगवान ब्रह्मा ने दिए हिरण्यकश्यप को दर्शन, मांगा वरदान
    हिरण्यकश्यप के तप की अग्नि देव लोक तक पहुँच गयी तथा समस्त देवताओं में हाहाकार मच गया। वे सभी भगवान ब्रह्मा से सहायता मांगने पहुंचे तब स्वयं भगवान ब्रह्मा हिरण्यकश्यप के तप की अग्नि को शांत करने पहुंचे तथा उसे दर्शन दिए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को पहले के जैसा बलवान तथा यौवन शरीर प्रदान किया तथा वरदान मांगने को कहा हिरणकश्यप ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा। जब हिरणकश्यप अपने पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए आता है तब प्रहलाद ने जवाब दिया मारने वाला है भगवान बचाने वाला भगवान परमात्मा हर जगह व्यापक है तभी नरसिंह अवतार में भगवान प्रगट हुए कुछ देर युद्ध चलता रहा जैसे ही दहलीज पर पहुंचे नरसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया और जयकारों के साथ पूरा पंडाल गूज गया।
    श्री कृष्ण का हुआ जन्म, रासलीला हुई शुरू
    भगवान श्री कृष्ण का कारागार में जन्म हुआ नन्ने से बाल कृष्ण भगवान को टोकनी में बैठाकर फिराया गया नंदलाल यशोदा के साथ-साथ ब्रज धाम रासलीला में डूब गया। तरह-तरह की झांकियों के माध्यम से सजाया प्रसंग का वर्णन चलता रहा। महाराजपुर के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्र से हजारों की संख्या में माता बहने एवं पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित साथ ही भगवान श्री कृष्ण की रासलीला देखते ही झूमने नाचने लगे पूरा शहर भक्ति मय हो गया।

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