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  • मासूम से दरिंदगी करने वाले सभी आरोपी दोषमुक्त

    मासूम से दरिंदगी करने वाले सभी आरोपी दोषमुक्त

    सतना। सतना शहर में 8 साल पहले हुई गैंगरेप की जिस सनसनीखेज वारदात को लेकर जन आक्रोश की ज्वाला भड़की थी और आवाम सड़कों पर उतर आया था। उस शर्मनाक घटना के अभियोजन ने अदालत की चौखट पर दम तोड़ दिया है। पुलिसिया विवेचना और अभियोजन इस घटना को अदालत में साबित ही नहीं कर पाए नतीजतन सभी आरोपी बेदाग बच निकले। अब एक बार फिर यह मामला शहर में लोगों की जुबान पर है और हर जुबान पुलिस की विवेचना पर सवाल उठा रही है। सतना शहर में वर्ष 2015 में हुए बहुचर्चित सगमनिया गैंग रेप कांड में अभियोजन अदालत के सामने अपराध साबित कर पाने में नाकाम साबित हुआ है। पुलिसिया विवेचना में हद दर्जे की लापरवाही के कारण कमजोर पड़े अभियोजन के कारण इस बहुचर्चित और सनसनीखेज मामले के सभी दोषियों अभिषेक सिंह, अंशुमान सिंह, हर्षवर्धन सिंह, कुसुम सिंह, प्रीति बागरी उर्फ रीतिका सिंह तथा निहारिका सिंह दोषमुक्त हो गए हैं। इनमें से प्रीति बागरी उर्फ रीतिका तथा निहारिका सिंह की मौत हो चुकी है। प्रकरण में राज्य शासन की तरफ से विशेष लोक अभियोजक हरिकृष्ण त्रिपाठी ने पैरवी की थी जबकि विवेचना तत्कालीन महिला थाना प्रभारी सियादुलारी ने की थी। यह मामला जुलाई 2015 में सतना शहर में सुर्खियों में आया था। नाबालिग को नशीली वस्तु का सेवन करा कर उसके साथ गैंगरेप करने और वीडियो- फोटो के जरिये उसे ब्लैकमेल करने के इस सनसनीखेज मामले को लेकर शहर में जनाक्रोश भड़क उठा था। लोग सड़कों पर उतर आए थे और पीडि़ता को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन छिड़ गया था। कैंडल मार्च निकले थे, शहर बंद हुआ था और आक्रोशित भीड़ ने सिटी कोतवाली के सामने धरना देकर सभा की थी। पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे थे शासन को तत्कालीन एडिशनल एसपी अभिषेक राजन को आनन फानन में सतना से हटाना पड़ा था। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रकरण अदालत में पेश किया गया था। लेकिन शुरुआत से ही विवेचना की लापरवाहियां सामने आने लगी थीं। इस प्रकरण पर राज्य शासन के अभियोजन निदेशक ने भी कुछ समय तक सीधे नजर रखी लिहाजा कुछ खामियां दूर भी हुईं और अभियोजन की दिशा भी बदल चुकी है। लेकिन बाद में बात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आई नतीजतन विवेचना की लापरवाहियों ने अभियोजन को अदालत में नाकाम कर दिया। अब शहर में लोगों की चर्चाओं के बीच विवेचना और अभियोजन की कमजोरी को लेकर तो सवाल उठ ही रहे हैं, यह प्रश्न भी मुंह उठाए हुए है कि अगर उस वक्त पीडि़ता के बयान के आधार पर पकड़े गए आरोपी बेदाग हैं तो आखिर दोषी कौन है? क्या पुलिस पीडि़ता को न्याय दिला पाएगी?

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