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  • प्रेम संस्कार के साथ हो तो शास्वत होता है: डॉ. कुमार विश्वास

    प्रेम संस्कार के साथ हो तो शास्वत होता है: डॉ. कुमार विश्वास

    छतरपुर। करोड़ों लोगों की आस्था के केन्द्र बागेश्वर धाम में मंगलवार से अपने-अपने राम थीम पर तीन दिवसीय उद्बोधन बीथिका शुरू हुई। युवाओं को सनातन से जोडऩे के कार्य में लगे युग वक्ता प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि प्रेम जब संस्कारों के साथ होता है तो वह शाश्वत होता है लेकिन जब यही प्रेम छुपकर वासना के साथ दिखता है तो यह मृत्यु तक ले जाता है। डॉ. विश्वास ने बागेश्वर बालाजी से प्रार्थना की कि उन्हें युवाओं को वामपथ से रामपथ पर लाने की शक्ति दे। इस अवसर पर बद्रीनाथ धाम के सिद्ध संत पूज्य बालक योगेश्वरदास महाराज, रामाश्रयदास महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री सहित अन्य सिद्ध संत उपस्थित रहे।
    प्रख्यात कवि एवं कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास देश-विदेश में भगवान श्रीराम की गाथा सुना रहे हैं। अपने-अपने राम थीम से व्याख्यान देकर यह बताने का प्रयास करते हैं कि मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम को जिसने जिस रूप में स्वीकार किया उसे उसी रूप में आनंद की प्राप्ति हुई। डॉ. विश्वास ने कहा कि कामदेव जब भगवान शंकर के सामने आया तो उसे मृत्यु का वरण करना पड़ा लेकिन वही कामदेव जब माता सीता के लुपर से आया तो वह अमर हो गया। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश चतुर्वेदी, छतरपुर विधायक ललिता यादव, विधायक बबलू शुक्ला, पूर्व विधायक प्रद्युम्र सिंह लोधी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
    सनातन विरोधियों ने हमारे देवों के प्रति फैलायी भ्रांतियां
    डॉ. कुमार विश्वास ने व्याख्यान में कहा कि वर्षों पूर्व सनातन विरोधियों ने हमारे आराध्य देव भगवान महादेव को नशेड़ी के रूप में रखा। इसी तरह भगवान कृष्ण को रसिया बनाया और श्रीराम को एक धोबी के कहने पर पत्नि को त्याग देने वाला चित्ररखा जबकि बाल्मीक रामायण में इस तरह का कोई प्रसंग नहीं है।
    साधना और परिश्रम से विश्व में विख्यात हुआ बागेश्वर धाम
    डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि साधना और परिश्रम के पसीने से यह धाम देश में विख्यात हुआ। 300 वर्ष पूर्व सद्गुरू भगवान सन्यासी बाबा ने साधना की और दादा गुरू ने त्याग किया। इन्हीं के पुण्य प्रताप से बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर लोगों के कष्टों का निवारण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे धर्मशास्त्रों ने इन्द्र के पुत्र जयंत का प्रसंग सुनाया जिसमें कहा गया कि भगवान श्रीराम ने एक तिनका उस कौआ के रूप में आए जयंत के पीछे छोड़ दिया था। विज्ञान ने पहले इसे नहीं माना लेकिन जब मिसाइलें टेड़े-मेड़े रास्ते से जाकर आकाश में हमला करती हैं तो विज्ञान को मानने वालों ने इसे स्वीकार कर लिया। इसी तरह बिना लोगों की उपस्थिति के आवाज की कल्पना शास्त्रों में की गई थी जो आकाशवाणी के रूप में सामने आयी।
    डीआईजी, कलेक्टर, एसपी हुए सम्मानित
    बागेश्वर धाम में पुलिस चौकी की स्थापना किए जाने एवं लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा में विशेष ध्यान देने के लिए कथा मंच से डीआईजी ललित शाक्यवार सम्मानित किए गए। उनकी अनुपस्थिति में एएसपी विक्रम सिंह ने सम्मान प्राप्त किया। छतरपुर जिले को ऊंचाईयों तक ले जाने, शैक्षणिक व्यवस्था में प्रदेश में पहले स्थान पर छतरपुर को पहुंचाने के लिए कलेक्टर संदीप जीआर सम्मानित हुए। वहीं कानून व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त करने के लिए एसपी अमित सांघी सम्मानित किए गए।

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