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  • खनन माफियाओं के आतंक से इंसानों से लेकर जानवरों तक की जान को खतरा, जिम्मेदार मौन

    कटनी, प्रवीण तिवारी। जिला कटनी के तहसील बहोरीबंद अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुआं से लागे खड़रा, कछारगांव, निमास, आमोच, धनगवां, छपरा, स्लीमनाबाद से लगे हुए जंगलों के बीच दर्जनों मार्बल की खदानें चल रही हैं। खदानों की खुदाई इस तरह की जा रही है जिसे देखते ही आंखे फट जाती हैं। गहराई निर्धारित समय सीमा से अधिक होती जा रही है लेकिन जिले का कोई भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा है। कई खदानें ऐसी हैं जो बंद हो चुकी है लेकिन उन बंद पड़ी खदानों में सुरक्षा के लिए बाउंड्रीबाल व तार फेंसिंग तक नहीं है, जिससे उन खुली पड़ी खदानों में अनेकों जानवर गिर कर मर चुके हैं।

    कुआं खड़रा से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही चल रही आमोच बॉक्साइट एंड ओकर माईन्स जो पट्टेदार डॉ.पी.सी. शर्मा के नाम से खसरा नंबर 1. 2. 3 एवं 4 जिसका रकवा, 16.187 हेक्टेयर है] इस माईन्स का कवरेज करने वाले पत्रकारों को ठेकेदार के गुर्गों द्वारा कवरेज करने से रोकने का प्रयास किया गया। इस माईन्स का साम्राज्य बेहद अधिक फैला हुआ है जिसकी गहराई अधिक होती जा रही है। खदान के चारों तरफ कोई भी तार फेंसिंग नहीं की गई। इस खदान में कार्य कर रहे मजदूरों ने अपनी पीड़ा को बयां करते हुए बताया कि हमें 9 बजे से 5 बजे तक कार्य पर रखा जाता है और एक दिन की मजदूरी 180 रुपये के रेट पर दी जाती जो बहुत ही कम है।
    इसके अलावा हम लोगों को खुद की सुरक्षा के लिए ना तो हेलमेट है और ना ही पैरों में जूते। जान जोखिम में डाल कर कार्य कर रहे हैं। और भी मार्बल खदानें हैं जिन्हें देखते ही बनता है। समय रहते अधिकारी कर्मचारी अगर ध्यान नहीं देते तो पता नहीं कितनी जानें जा चुकी होंगी और आने वाले समय पर जानवरों से लेकर इंसानों तक कितनी जाने जाएंगी इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

    माइंस में कितनी खुदाई कर ली कर्मचारियों को नही पता
    सरकार द्वारा कुछ निश्चित मापदण्डों पर माइंसो की स्वीकृति की जाती है कि निर्धारित सीमा तक ही खुदाई की जा सकती है परंतु जब उन माइंस में जाकर देखा गया तो पता चला कि वहाँ के कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नही है कि कितनी खुदाई कर ली गई है। माइंस के अंदर बैठे जिम्मेदार जबाव देने से बचते नजर आए और उनका कहना था कि हमें तो कुछ मालूम ही नही है। हम लोगों को जो ठेकेदार द्वारा कार्य बताए जाते हैं उनको ही करवाने से मतलब रहता है, हमें बाकी कुछ नही पता।

    आमोच बॉक्साइट एंड ओकर माईन्स में सुरक्षा के इंतजाम गायब
    इन माइंस में कार्य करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के इंतजाम तो खदान संचालको द्वारा किये नही जाते परन्तु अगर किसी मजदूर की दुर्घटना ग्रस्त मौत हो जाती है तो चंद रुपयों से उस मजदूर की जिंदगी की कीमत तय करके उठने वाली आवाज़ों को चार दिवारी के अंदर ही दफन कर दिया जाता है ।

    माइंसो में निर्धारित मापदंडों पर हो रहे खनन के कार्यो की जांच करने वाले जिम्मेदार अधिकारी नदारद
    कटनी जिले की माइंसो में कितना खनन किया जा चुका है कितने खनन की स्वीकृति दी गई थी। माइंस में सुरक्षा की व्यवस्था, कार्य करने वाले मजदूरो की सुरक्षा व्यवस्था, सहित चल रहे खनन कार्यो के आसपास तारबाड़ी सहित बाउंड्रीवाल की क्या व्यवस्था है। साथ ही खनन माफियाओं द्वारा खुदाई के बाद निकलने वाले अनउपयोगी मटेरिल को कहा डंप किया जा रहा है इन सब सहित अनेकों जरूरी मापदंडों पर ध्यान देकर जांच करने वाले माइनिंग के जिम्मेदार अधिकारी नदारद नजर आ रहे है और इन खनन माफिया द्वारा धड़ल्ले से सभी नियमों को दरकिनार करते हुए बेख़ौफ़ खुदाई की जा रही है। अब तो जिम्मेदारो पर भी सवाल उठाना स्वाभाविक होगा तभी तो इन खनन माफियाओं द्वारा बन्द खदानों को खुल्ला छोड़ दिया गया, सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जा रही और मन माने तरीकों से कार्य किया जा रहा है।

    तो वही वॉइस ठेकेदार पप्पू तिवारी का कहना है कि फिल्ग ( गड्ढा ) की पुराई चालू है काफी पुराई हो चुकी है जो भी बाकी है वह भी जल्द से जल्द हो जाएगी क्योंकि हमें शासन के निर्देश रहते हैं कि जो भी गड्ढा आपको खोदोगे उसे पूरा पेककर बंद भी करोगे रही बात लेबर सुरक्षा की तो जो भी व्यवस्थाएं हैं हम लोग कर ही रहे हैं पानी वेतन आदि से

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