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  • 28 लाख रूपए सालाना की नौकरी छोड़कर नीरज कर रहे फूलों की खेती

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    सतना, अंबिका केशरी। देश की कई सीमेंट फैक्ट्रियों में बतौर उद्यान अधिकारी के पद पर कार्यरत सतना निवासी नीरज त्रिपाठी नौकरी के दौरान बार-बार ट्रांसफर से परेशान थे। ऐसे में एक बार इन्हें बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मौका मिला। उन्होंने महाराज जी से अपनी सारी समस्याओं का बखान किया। इसके बाद बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने उन्हें एक शायरी के माध्यम से फूलों की खेती करने का आर्शीवाद दिया।

    फिर क्या नीरज त्रिपाठी नौकरी को त्यागकर पीछे मुडकर नहीं देखा और सतना-कोठी मार्ग में बगहा स्थित खेत में फूलों की खेती करना शुरू किया। नीरज त्रिपाठी पिछले 4 साल से थाइलैंड वैरायटी के गेंदा के फूल, रजनीगंधा व कश्मीरी गुलाब की खेती कर रहे है। इससे इन्हें कई गुना आमदनी भी हो रही है। नीरज त्रिपाठी किस प्रकार से खेती करते और इसमें उन्हें कितनी लागत आती है। इसको लेकर उन्होंने पेप्टेक टाइम मप्र समाचार से खास बातचीत की।

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