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  • आभा श्रीवास्तव के काव्य संग्रह रंगमंच का हुआ विमोचन

    आभा श्रीवास्तव के काव्य संग्रह रंगमंच का हुआ विमोचन

    छतरपुर। स्कूल शिक्षा विभाग की रिटायर्ड प्राचार्य और वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री आभा श्रीवास्तव के काव्य संग्रह का रविवार को एक निजी होटल में अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। उनके इस काव्य संग्रह में 51 कविताएं संग्रहित की गईं हैं जो उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और विभिन्न विषयों,चरित्रों और पात्रों को समाहित करके लिखी हैं।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता छतरपुर की वरिष्ठ कवियित्री मालती श्रीवास्तव ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर सागर की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शरद सिंह मंचासीन रहीं। विशिष्ट अतिथियों में प्रो.सुजाता मिश्रा, डॉ बहादुर सिंह परमार, डॉ पुष्पा दुबे और रंगकर्मी व पत्रकार शिवेन्द्र शुक्ला मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सारस्वत ने किया।
    अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि डॉ शरद सिंह ने कहा कि आभा श्रीवास्तव की कविताएं मार्मिक हैं और जीवन के हर प्रसंगों से जुड़ीं हैं। उनकी कविताओं में खास बात यह है कि ये कविताएं सहज और सरल भाषा में लिखी गईं हैं।सरल लिखना सबसे कठिन कार्य होता है लेकिन कवियित्री ने उसे बखूबी निभाया है। डॉ बहादुर सिंह परमार ने बीते दिनों को याद करते हुए आभा श्रीवास्तव के साहित्य के सफर को याद करके कुछ संस्मरण पटल पर रखे और बताया कि लगभग 40 वर्षों से वे साहित्य की गोष्ठियों और मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहीं हैं और आज सेवानिवृत्ति के बाद भी साहित्य जगत में सक्रिय हैं। सागर विश्वविद्यालय की प्रो.सुजाता मिश्रा ने कहा कि उनका आभा जी से परिचय नहीं था लेकिन उनकी कृतियां देख और पढ़कर आनंद आया। वे साहित्य जगत के लिए सराहनीय कार्य कर रही हैं।विशिष्ट अतिथि डॉ पुष्पा दुबे ने उनकी दिवंगत माता को याद करते हुए संग्रह में शामिल एक कविता का जिक्र करके सदन को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा की एकाकी जीवन में उनकी मां एक बड़ा सहारा थीं और उनके जाने पर एक बड़ी क्षति हुई है।
    अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ कवियित्री मालती श्रीवास्तव ने भरपूर सराहना और आशीर्वाद के साथ लगातार कार्य करने की प्रेरणा देते हुए अपनी एक नवीन रचना का पाठ भी किया।
    कार्यक्रम के अंत में डॉ आभा श्रीवास्तव ने कविता संग्रह की यात्रा पर चर्चा करते हुए कुछ रचनाओं का पाठ किया और सभी आगंतुकों के प्रति आभार जताया। इस दौरान प्रवीण गुप्त, नीरज खरे, हंसा परमार, रेखा वासुदेव, अभिद्रीप सुहाने, अंजली नामदेव, शिल्पा रैकवार, राजेश सहित नगर के गण्यमान्य साहित्यकार और सुधीजन उपस्थित रहे।

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