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  • रामचरित मानस जैसा कोई ग्रंथ नहीं है, यह भारतीय संस्कृति का उत्कृष्ट सर्वाेत्कृष्ट संस्करण हैः श्रीरामभद्राचार्य महराज

    सतना/उचेहरा, रविशंकर पाठक। मानस पीठ खजुरीताल में शताब्दी महोत्सव के सातवें दिन सुबह की बेला में हवन कार्यक्रम के दौरान लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा। श्रीराम कथा का वाचन करते हुए पद्मविभूषण श्रीरामभद्राचार्य महराज ने कहा यहाँ भगवान एक रात रुके थे, यह क्षेत्र चित्रकूट में आता है जहाँ भगवान राम कम से कम बनवास काल में 12 वर्ष तक विराजे। 1-2 वर्ष नहीं तो इसीलिए रामचरित मानस में नमामि भक्त वात्सल्य में 12 प्रमाणिक छंद कहे गए। भगवान राम का न तो साकेत गमन होता है ना ही सीता जी धरती में समाती हैं, वो निरंतर है। आठों पुत्रों को राज्य विभा करके भगवान राम ने स्वयं कह दिया बालकों से की तुम लोग अब ये संभालो और हम चारों भाई और तुम्हारी चारों माताएँ हम लोग चित्रकूट में विश्राम करेंगे। इसीलिए दोहाबली के दूसरे छंद में कहा गया ष्चित्रकूट सब दिन बसत प्रभू सिया लखन समेत राम नाम जप जाप कही तुलसी अभिमत देतष् चित्रकूट में भगवान राम सब दिन बस्ते है निरंतर निवास करते है सर्वत्र भगवान राम का प्रवास होता है पर चित्रकूट में निवास होता है। आज रामचरित मानस जैसा कोई ग्रंथ नहीं है यह भारतीय संस्कृति का उत्कृष्ट सर्वाेत्कृष्ट संस्करण है। वहीं कथा व्यास पद्मविभूषण श्रीरामभद्राचार्य महराज ने अमरपाटन जनपद पंचायत के अध्यक्ष प्रतिनिधि युवा नेता विनीत पाण्डेय को अमरपाटन का विधायक बनने का आशीर्वाद दिया।

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