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  • जन्म से शक्ति सृजन की गाथा बता रही बागेश्वर धाम दर्शन दीर्घा

    जन्म से शक्ति सृजन की गाथा बता रही बागेश्वर धाम दर्शन दीर्घा

    छतरपुर। गढ़ा ग्राम आज परिचय का मोहताज नहीं। दुनिया में बागेश्वर धाम के नाम से विख्यात हो चुके तीर्थ स्थल के पीठाधीश्वर पं धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के जन्म से लेकर अब तक की सनातन यात्रा को संजोये एक दर्शन दीर्घा तैयार की गई है। इस प्रदर्शनी में पूज्य महाराज श्री के जन्म से लेकर शक्ति सृजन की गाथा है। विगत रोज महाराजश्री में प्रदर्शनी का उद्घाटन क्या उद्घाटन के बाद इस प्रदर्शनी को आम लोगों के लिए खोल दिया गया ताकि वे बागेश्वर धाम की महिमा और महाराज श्री के अब तक के जीवन काल में घटित हुये घटना क्रम को जान सके।
    पेप्टेक ग्रुप छतरपुर की ओर से सजाई गई दर्शन दीर्घा में उल्लेख किया गया कि आज 27 वर्ष पहले बेहद गरीब परिवार में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर महाराज श्री का जन्म हुआ था। 3 संतानों में सबसे बड़े होने के कारण महाराज श्री को बचपन से माता-पिता का दुलार मिला और अवस्था बड़ी होते ही जिम्मेदारी मिलने लगी। कक्षा आठवीं तक अपने ग्राम गढ़ा में शिक्षा हासिल करने के बाद महाराज श्री आगे की पढ़ाई करने वे गांव से 5 किलोमीटर दूर गंज पहुंचे। घर की स्थिति काफी दयनीय होने के कारण तमाम पारिवारिक समस्याओं से महाराज जी को जूझना पड़ा। महराज श्री के दादा जी प्रसिद्ध संत थे और वे गांव के पास ही एक कुटिया बनाकर सन्यासी का जीवन व्यतीत करते थे। महाराज श्री जब नो वर्ष के थे और घर में परिस्थितियों का बहार टूटा तो वे अपने दादा गुरु जी के पास पहुंचे और व्यथा बताई। दादा गुरु जी ने महाराज श्री का हाथ पकड़ कर बालाजी के हवाले कर दिया और कहा बालाजी आज से यह बालक आपका और आप इस बालक के। महाराज श्री को जो आंतरिक प्रेरणा मिली उसके आधार पर उन्होंने अज्ञातवास में 40 दिन बिता कर साधना की, परिणाम सबके सामने है। अपने अज्ञातवास के बल पर गढ़ा का एक बालक बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर बने और उन्होंने इस साधना के माध्यम से लोगों की दैहिक, दैविक और भौतिक व्याधियों को निपटाने के लिए दिए दरबार शुरू किये। महाराज श्री देव पत्रकारों के माध्यम से जनता की कष्टों का निवारण किया तो वहीं दूसरी ओर जनमानस में हिंदुत्व की चेतना जगाने के लिए राम कथा, श्रीमद भागवत कथा एवं श्री हनुमंत कथा प्रारंभ की। सनातन के प्रचार के कारण वे धर्म विरोधियों की आंखों की किरकिरी भी बने लेकिन रायपुर की कथा और दरबार के दौरान विधर्मियों को मुंह की खानी पड़ी। लाखों लोगों की उपस्थिति में शक्तियों के प्रमाण सिद्ध हुए। महाराज श्री एक हिंदू एक गाय, पौधरोपण एवं गरीब कन्याओं के विवाह के संकल्प पूरे करने में लगे हैं।
    सांस्कृतिक मंच से गूंजे सुरभि चतुर्वेदी के स्वर
    बागेश्वर धाम के सांस्कृतिक मंच से बीती रात सुरभि चतुर्वेदी की भजन संध्या आयोजित की गई। इस विशाल आयोजन में हर रोज कार्यक्रम रखे जा रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम के क्रम में शनिवार की रात जानी मानी गायिका सुरभि चतुर्वेदी के भजनों से उपस्थित विशाल जब समुदाय झूमता रहा। भजन संध्या के शुरुवात बुंदेली गीत से हुई। बुंदेली गीत के माध्यम से आगामी 8 मार्च को होने वाले कन्या विवाह के लिए लोगों को आमंत्रित किया गया। राजस्थानी माटी से आई सुरभि चतुर्वेदी ने एक से बढकर एक भजन प्रस्तुत किए। भजन के स्वर और वाद्य यंत्रों की ताल पर भक्त भाव विभोर हो कर नृत्य करते देखे गए।
    महाराज श्री के सानिध्य में 6 घंटे में 3 हजार लोगों ने कराई जांच
    बागेश्वर धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि यहां से तमाम रिकार्ड भी बन रहे हैं।स्वास्थ्य के छेत्र में विगत रोज एक विश्व रिकार्ड बना है। एक स्थान पर एक साथ करीब 3 हजार लोगों का ब्लैक ग्रुप जांचा गया। करीब 6 घंटे में 3 हजार लोगों का ब्लड ग्रुप जांच कर विश्व रिकार्ड बनाया गया।
    बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के सानिध्य में छतरपुर से आई डॉ स्वेता गर्ग की टीम ने बागेश्वरधाम में ब्लड ग्रुप जाचने का शिविर आयोजित किया। महाराज श्री के आह्वान पर महेश 6 घंटे में करीब 3 हजार लोगों के ब्लड ग्रुप की जांच की गई और यह जांच विश्व रिकार्ड की किताब में दर्ज हो गया। इसके पहले का रिकार्ड मध्य प्रदेश के पास ही था। खरगौन में करीब ढ़ाई हजार लोगों की जांच हुई थी। इस रिकार्ड के बनाए जाने से महाराज श्री ने सभी को साधुवाद दिया। ब्लड ग्रुप की जांच पूरी तरह से नि:शुल्क थी।

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