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    बदहाली के आंसू रो रहे शहर के अधिकतर तालाब

    सतना। शहर के अधिकतर तालाब इन दिनों अपने बदहाली के आंसू रो रहे है। इन तालाबों के जीर्णोधार के लिए आजतक किसी ने भी रूचि नहीं दिखाई। शहर के पतेरी स्थित तालाब की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। इस तालाब की सूरत बिगाडने में कहीं न कहीं स्थानीय लोगों का भी हाथ है। क्योंकि घर से निकलने वाले कचरे को ढेर को यहां के रहवासी तालाब में फेंक देते है। जिसके कारण तालाब दिन प्रतिदिन गंदगी से पटा जा रहा है। यही हालत शहर के सबसे प्राचीन तालाब जगतदेव तालाब की है। लोगों के लिए आस्था का केंद्र बने इस तालाब की सूरत बदलने के लिए शहरवासियों ने कई बार आवाजें बुलंद की। लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से किसी ने भी इस ओर मुडकर नहीं देखा। गौरतलब है कि शहर में एक दर्जन से अधिक तालाबों मे से सिर्फ 2 ही तालाबों का स्मार्ट सिटी के तहत कायाकल्प हो पाया है। बांकी के तालाब अपनी बदहाली के आंसू रो रहे है। कई तालाब तो अतिक्रमण की चपेट में आ चुके है। अतिक्रमणकारियों ने तालाब के चारों ओर लंबी इमारतें तान ली है।

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