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    गर्मी की दस्तक से बढ़ी देशी फ्रिज की मांग

    छतरपुर। गर्मी का मौसम शुरू होते ही देशी फ्रिज के नाम से मशहूर मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ गई है। शहर में जगह-जगह मिट्टी के बर्तनों की दुकानें सज गई हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है शहर की सड़कों पर मटकों की दुकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन पर अलग-अलग वैरायटी के मटके हैं और मटकों की कीमत 100 से 200 रुपए तक है।
    शहर के आकाशवाणी तिराहा से छत्रसाल चौक तक मटकों की दर्जनों दुकानें लगी हुई हैं। रविवार को यहां साप्ताहिक हाटा-बाजार के चलते मटकों की खासी बिक्री हुई।
    मटका विक्रेता अनंतराम प्रजापति ने बताया कि वे हर वर्ष छतरपुर में मटके की दुकान लगाते हैं, होली के बाद से मटकों का विक्रय शुरु हो जाता है। अनंराम बताते हैं कि मटकों को बनाने का कार्य उनके द्वारा दीपावली के बाद से शुरु किया जाता है। करीब 4 महीने की कड़ी मेहनत के बाद मटके तैयार होते हैं और मार्च के अंतिम सप्ताह से मटकों की बिक्री शुरु हो जाती है। अनंतराम बताते हैं कि प्राचीन समय से भारतवर्ष में मटकों में जल भरकर, इससे प्यास बुझाने की परंपरा रही है लेकिन अब आधुनिक दौर में लोग फ्रिज सहित कई अन्य उपकरणों का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे मटकों की बिक्री पर असर हुआ है। हालांकि ग्रामीण अंचलों के साथ-साथ शहरी इलाकों के जागरुक लोग आज भी देशी फ्रिज यानि की मटके के पानी का ही इस्तेमाल करते हैं।
    स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है घड़े का पानी
    चिकित्सकों का भी यह मत है कि घड़े का पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। आज भले ही लोग वैज्ञानिक उपकरण जैसे फ्रिज, वाटरकूलर आदि का इस्तेमाल करने लगे हों लेकिन इनकी तुलना में मटके का पानी स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी है। दरअसल मटके में पानी भरकर उसे ठंडा किए जाने के दौरान मिट्टी में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे सूक्ष्म खनिज, पानी को स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं। ऐसे खनिज युक्त पानी का नियमित सेवन करने से हमारा स्वास्थ्य और शरीर का खनिज संतुलन बेहतर होता है।

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