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    वीसी को अस्पताल ले जाने के लिए जज की कार छीनने वाले छात्रों को मिली जमानत

    ग्वालियर। बीमार वीसी को अस्पताल ले जाने के लिए जज की कार छीनने के मामले में बीते रोज ग्वालियर हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आज दोनों आरोपी छात्र नेता सेंट्रल जेल से रिहा हुए। दोनों छात्र नेताओं को लेने के लिए एबीवीपी नेता व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जेल के बाहर मौजूद थे। जैसे ही दोनों छात्र नेता जेल से बाहर आए एबीवीपी नेता और कार्यकर्ता उनसे गले मिले, उनका पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया और जमकर नारेबाजी की।
    दरअसल 10 दिसंबर को दिल्ली में संपन्न हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने के बाद कार्यकर्ता दक्षिण एक्सप्रेस में सवार होकर ग्वालियर लौट रहे थे। इसी उन्हें जानकारी मिली कि ट्रेन के स्लीपर कोच में सवार एक निजी विश्वविद्यालय के वीसी रणजीत सिंह यादव की तबीयत खराब हो गई है और उनकी हालत गंभीर है। इसी के बाद ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंचते ही एबीवीपी कार्यकर्ता हरकत में आ गए। उन्होंने स्टेशन के बाहर खड़ी एक कार को अपने कब्जे में लिया और बीमार वीसी को लेकर अस्पताल पहुंचे। लेकिन अस्पताल में नब्ज टटोलते ही डॉक्टर्स ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। इस दौरान पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई। क्योंकि कार चालक ने पुलिस को बताया था कि कार हाई कोर्ट जज की है और कुछ लड़के कार छीनकर ले गए हैं। पुलिस ने कार चालक की शिकायत पर डकैती अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया। बाद में पुलिस अस्पताल पहुंच गई। पुलिस को अस्पताल में कार खड़ी मिल गई और कार लेकर भागे लडकों से चाबी भी मिल गई। पुलिस पूछताछ की बात कहकर दोनों को थाने ले आई। पकड़े गए आरोपी ग्वालियर में मुरार निवासी हिमांशु श्रोती और शिवपुरी निवासी सुक्रत शर्मा थे और एबीवीपी छात्र नेता थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 दिसंबर को दोनों आरोपियों को जिला कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। वहीं दोनों छात्र नेताओं की गिरफ्तारी का मामला तूल पकड़ गया। एबीवीपी कार्यकर्ता लगातार आंदोलनरत थे। 17 दिसंबर को मामला मध्य प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान में आया तो उन्होंने सीआईडी जांच के आदेश दे दिए। साथ ही पुलिस महानिदेशक को ऐसे मामलों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएफ जस्टिस को पत्र लिख दोनों छात्र नेताओं को माफ किए जाने का आग्रह भी किया। इधर एबीवीपी ने इस मामले में दोनों छात्र नेताओं की जमानत के लिए एमपी हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद दोनों छात्र नेताओं को अदालत ने सशर्त जमानत दे दी। सोमवार को सेंट्रल जेल की कागजी कार्रवाई पूरी नहीं होने के चलते दोनों छात्र नेताओं को रात जेल में ही काटनी पड़ी। इसके मंगलवार शाम को दोनों छात्र नेता ग्वालियर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिए गए। रिहाई के बाद छात्र नेता हिमांशु श्रोती ने कहा है कि उनका उद्देश्य पीडि़त मानवता की मदद करना था। कार जज की थी इस बात की उन्हें जानकारी नहीं थी। हिमांशु का कहना है उन्हें इस बात का खेद है कि वे बीमार वीसी को बचा नहीं सके। उनका कहना है अगर 10 मिनिट पहले उन्हें कोई एंबुलेंस मिल जाती तो शायद आज मरीज जिंदा होता। हिमांशु ने कोर्ट के आदेश को सत्य की जीत करार दिया है और कहा है कि ये एबीवीपी कार्यकर्ताओं की जीत है। एक सवाल के ज़बाब में हिमांशु श्रोती ने फिल्मी अंदाज में ज़बाब देते हुए कहा, अगर मानवता की सेवा का उन्हें मौका मिलेगा तो वे जरूर करेंगे, और अगर उनसे कोई अपराधी कहेगा तो वे ऐसे अपराध बार बार करेंगे।

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