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  • हमारी संस्कृति की विशेषता है वसुधैव कुटुंबकम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    हमारी संस्कृति की विशेषता है वसुधैव कुटुंबकम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि लोकरंग हमारे लोक मूल्यों, कलात्मक समृद्धता को उजागर कर युवाओं और बच्चों को हमारी सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि लोकरंग सबके साथ, विश्वास और प्रयासों से भारत के गौरवपूर्ण अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करेगा।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आज़ाद भारत में हम सब जो सुखी, समृद्ध और स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं, वह हमारे पूर्वजों के अमर बलिदान की अमूल्य विरासत है। गणतंत्र दिवस का पर्व आज़ादी के सैनानियों के अदम्य शौर्य, साहस, त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेकर विकसित भारत बनाने के लिए प्रतिबद्ध होने का अवसर है। राज्यपाल श्री पटेल रवीन्द्र भवन परिसर में आयोजित पाँच दिवसीय 39वें लोकरंग पर्व के शुभारम्भ कार्यक्रम में उपस्थित कला प्रेमियों को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम कला के विभिन्न स्वरूपों द्वारा नैतिक मूल्यों, मान्यताओं को संरक्षित कर हमारी सांस्कृतिक विविधताओं के भावनात्मक एकत्व को मज़बूत बनाते हैं। विविधता में एकता हमारे देश की संस्कृति है, जिसमें हजारों वर्षों की हमारी लोक संस्कृति की मान्यताएं, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन की निरंतरता का विशाल खजाना छुपा है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विविधता सही अर्थों में हमारे देश की धरोहर है, इसका निरंतर संरक्षण और विकास सुनिश्चित करना हम सभी का कर्तव्य है। राज्यपाल श्री पटेल ने इस वर्ष समारोह में महान संत शिरोमणि रविदास जी का जीवन, उनकी वाणी को नृत्य-नाट्य में प्रस्तुत किये जाने, पारम्परिक बैगा समुदाय की ख्यात चित्रकार पद्मश्री सुश्री जोधइया बाई के सृजित चित्रों की प्रदर्शनी ‘चित्रकथा’ के संयोजन, प्रदेश गोण्ड और भील जनजाति के पारम्परिक चित्रकारों उनकी कलात्मकता के प्रदर्शन का मंच भी प्रदान किये जाने और प्रदेश एवं अन्य राज्यों के लगभग 300 पारम्परिक शिल्पियों के लिए कार्यशाला, उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय का मंच उपलब्ध कराने के लिए आयोजकों की सराहना की।

    उन्होंने नृत्य, गायन और वादन कला रूपों की प्रस्तुतियों के साथ ही जनजातीय लोक अंचलों के व्यंजन से परिचित कराने के लिए आयोजित स्वाद मेले के आयोजन को सराहनीय बताया।

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